MukeshWrites

Far From Over

Into the richness of breezeI can listen my storieswhispered to every earstories of my successessays of my failure How near could i getto gist of lifehow far i remainfrom dirt of world Tales of my stepsBeginning of my worldTravelogue of my journeyStories of my companionsStories i heard and never told Have i been playing wellthisContinue reading “Far From Over”

मेरा ज़िंदा होना अभी बाकी है

सूर्य के ललाट पेकिस्मतों की फुहार हैसिकन चाँद के माथे पे हैधरती पे तो फिर भी बहार है गरज के शांत क्यों हो गए बदल तुमटकराये नहीं तुम आज पिघलते अरमानों सेछोड़ दिया तुमने भी आसमानों को अकेलाडर गए क्या मुश्किलों की चंद मुलाकातों से मुकर जाने दो हवाओं कोसाँसों को कब तक धमकाओगेसब्र काContinue reading “मेरा ज़िंदा होना अभी बाकी है”


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