I am a fool, of Words

Hollow horses of words storming fastBouncing amidst brain and heartEmotions appealing  the skiesIn the realm of Chirpy heartBrain, just an outcast. Rain of PromisesIn the charm of paper boatsIs it a glittering rainbowOr just a mirage and a crossbow. Flamboyant is journey of wordsDrugged by dancing dreamsNumb lies brain to keep up or give upWhere’sContinue reading “I am a fool, of Words”

मेरा ज़िंदा होना अभी बाकी है

सूर्य के ललाट पेकिस्मतों की फुहार हैसिकन चाँद के माथे पे हैधरती पे तो फिर भी बहार है गरज के शांत क्यों हो गए बदल तुमटकराये नहीं तुम आज पिघलते अरमानों सेछोड़ दिया तुमने भी आसमानों को अकेलाडर गए क्या मुश्किलों की चंद मुलाकातों से मुकर जाने दो हवाओं कोसाँसों को कब तक धमकाओगेसब्र काContinue reading “मेरा ज़िंदा होना अभी बाकी है”

रास्ते मेरा वजूद

दुनिया के पास मैंखुद से ही दूर गयाअज्ञात वजूद मेराधुंध में उछल गया याद आयी जड़ें मेरीजब शहरों में मचल गयामाँ का प्यार, पुकारसब याद आयाजो रिश्तों की ठंड में भीमोम से पिघल गया ज़मीर के किस्से खूब सुनेकुछ फूल बंजारे चुनेबिखर के रह गयी इंसानियतसिक्को की छनक भी खूब गिने याद आया गांवगांव कीContinue reading “रास्ते मेरा वजूद”

जड़ें आसमाँ की

उड़ चला था एक पंछीफड़फड़ाते आसमाँ मेंजले थे दीप आँखों मेंउम्मीदें भी पतंग थी ढूंढते चिराग की ज़मीनइरादे बुलंद थेऊँची ज़मीन, सजे हुए सपनेना जाने हवाओं ने क्या क्या दिखाया उन्माद में नए रास्तों केजीवन की डोर थामने की कशिशउड़ रहा था एक पंछीबिजली से कड़कती आसमाँ में रात हुई जो चाँद के इशारे पेसितारोंContinue reading “जड़ें आसमाँ की”

पतझड़ वसंत

खुशबू बरसात कीढक रही ज़ारों की धुप कोशाम की उलझनसमेट रही हैं गुनगुनी सुबहों को गगन की पहुंच दूर हैज़मीन भी आस्मां की हैमुसाफिर मैंखुद की उमीदों का जली हैं धड़कनेंआग की इश्क़ मेंझगड़ गया खुद के अरमानों सेहारा खुद के ही पैमानों से खबर नहीं थी मुझकोखुद के ही लिबास कीकिस दोराहे पे मिलाContinue reading “पतझड़ वसंत”

थोड़ी सी प्यास बचाई है

सूखती हलक के रास्तेरूठी धड़कनों के वास्तेसमन्दरों की छाँव मेंऐ मेरी ज़िन्दगी,थोड़ी सी प्यास बचाई है बेच दी अपनी मंज़िलगिरवी रखी है अपनी सांसेंखरीदें हैं कुछ रास्तेदो कदम का साथ हो तेराऐ ज़िन्दगी,खामोश राहों में एक रात सजाई है खेल ये अरमानों काखेलेंगे कब तकगीले आस्मां में उडी है मेरी पतंगडोर थामी जो तूने ऐContinue reading “थोड़ी सी प्यास बचाई है”