जड़ें आसमाँ की

उड़ चला था एक पंछीफड़फड़ाते आसमाँ मेंजले थे दीप आँखों मेंउम्मीदें भी पतंग थी ढूंढते चिराग की ज़मीनइरादे बुलंद थेऊँची ज़मीन, सजे हुए सपनेना जाने हवाओं ने क्या क्या दिखाया उन्माद में नए रास्तों केजीवन की डोर थामने की कशिशउड़ रहा था एक पंछीबिजली से कड़कती आसमाँ में रात हुई जो चाँद के इशारे पेसितारोंContinue reading “जड़ें आसमाँ की”

पतझड़ वसंत

खुशबू बरसात कीढक रही ज़ारों की धुप कोशाम की उलझनसमेट रही हैं गुनगुनी सुबहों को गगन की पहुंच दूर हैज़मीन भी आस्मां की हैमुसाफिर मैंखुद की उमीदों का जली हैं धड़कनेंआग की इश्क़ मेंझगड़ गया खुद के अरमानों सेहारा खुद के ही पैमानों से खबर नहीं थी मुझकोखुद के ही लिबास कीकिस दोराहे पे मिलाContinue reading “पतझड़ वसंत”

थोड़ी सी प्यास बचाई है

सूखती हलक के रास्तेरूठी धड़कनों के वास्तेसमन्दरों की छाँव मेंऐ मेरी ज़िन्दगी,थोड़ी सी प्यास बचाई है बेच दी अपनी मंज़िलगिरवी रखी है अपनी सांसेंखरीदें हैं कुछ रास्तेदो कदम का साथ हो तेराऐ ज़िन्दगी,खामोश राहों में एक रात सजाई है खेल ये अरमानों काखेलेंगे कब तकगीले आस्मां में उडी है मेरी पतंगडोर थामी जो तूने ऐContinue reading “थोड़ी सी प्यास बचाई है”

मुस्कान बंद लिफाफे की

रवानी है सोच कीएहसास झिलमिल साँसों कीनज़्म मेरी संवर गयीजो झलक मिली उस खवाब की शंख-नाद क्या कल का हैबजी जो धुन इरादों कीखुशबू क्या चेनाब की हैआस में लोट पोट, रम गयी आहेंइंतज़ार क्या बस अब वक़्त का है बिखरने दो अब मेरी सांसेंजोश धड़कनों में हैगगन से दूरी अब बर्दाश्त नहींहाथों की लिखावटअबContinue reading “मुस्कान बंद लिफाफे की”

Nature Cares

Beyond the rise of daysFall of nightsNature is always on movePeace of mountainsMassaging breaths Twinkling, smiling dewsLiving life of compassionLaughing Paddy, Barley, WheatEmotions riding highWith Swaying wind While Chaos looks to dominateWith a perception of being inevitableA non ending song of melancholyNights of waning moon Sun sets, risesPerception of nothingness goesAs what is eternal isGloryContinue reading “Nature Cares”

तलब सोखती धुप की है

असहज है आस्मां थोड़ाज़ाहिर है ज़मीन की तड़प भीकैद सांसें हवाओं कीलहरें घबरायी सी हैं तूफ़ान ख़ामोशी कीघेर रही रास्तों कोकाँप सी रही रूहहंसती वसंत की खुली आँखें चाँद कीअँधेरा अब गले तक हैलड़खड़ा रहे अब पाँवजाँबाज़ बरगद के तलब रौशनी की हैएहसास हो भरोसे काटूटे अशांतधड़कनों का सन्नाटाछलक रही आँखेंतलब सोखती धुप की है

बूझते अलाव सा मुस्काना

सहज बूंदों का एहसासएक बूझती आग की तलाशझूमती नाचती बलखातीबरसों से सिमटी एक प्यास गगन की बुलंदियों सेनज़रों की साजिशबिखरे खवाबों के गुलदस्तेआज हैं गीले गीलेनाराज़ शर्मीली हवाओं से लहरों से क्या कहेंधुल की बातेंउछल कूद में गुम हैंसितारें उसके भी ऐ हवा,सुनएक चिट्ठी लिखी हैलिखी है दिल की बातेंकुछ अधूरी मुलाकातेंकुछ घबराती आहटेंछिपा केContinue reading “बूझते अलाव सा मुस्काना”

संवरता आयाम

कैद खुली राहों मेंबसर करती है ज़िन्दगीसफर साँसों का हैमंज़िल वही जहाँ सांसें रुके खिलौने की शक्ल में क्या गुमान हैकंधे शान से चलें, यही इनाम हैटूटती, बिखरती, खिलखिलातीज़िन्दगी एक संवरता आयाम है |