बूझते अलाव सा मुस्काना

सहज बूंदों का एहसासएक बूझती आग की तलाशझूमती नाचती बलखातीबरसों से सिमटी एक प्यास गगन की बुलंदियों सेनज़रों की साजिशबिखरे खवाबों के गुलदस्तेआज हैं गीले गीलेनाराज़ शर्मीली हवाओं से लहरों से क्या कहेंधुल की बातेंउछल कूद में गुम हैंसितारें उसके भी ऐ हवा,सुनएक चिट्ठी लिखी हैलिखी है दिल की बातेंकुछ अधूरी मुलाकातेंकुछ घबराती आहटेंछिपा केContinue reading “बूझते अलाव सा मुस्काना”

संवरता आयाम

कैद खुली राहों मेंबसर करती है ज़िन्दगीसफर साँसों का हैमंज़िल वही जहाँ सांसें रुके खिलौने की शक्ल में क्या गुमान हैकंधे शान से चलें, यही इनाम हैटूटती, बिखरती, खिलखिलातीज़िन्दगी एक संवरता आयाम है |

क्या तुझे वो कुंदन कहूँ

सोचती झलक निगाहों कीमहक तेरे लिबास कीघुंगरली नज़्म मेरीशरमाई सी, सकुचाई सी बादलों की नब्ज़ पकड़ूँया हवाओं की बंदिशें सुनूँहया में लिपटी मुस्कान उसकीसराबोर कुछ बूंदों से नैन मेरे पढ़ूँ आज मैं खुद की तलबया तुझे ज़िन्दगी मान कुछ लिखुँझिलमिलती ख्वाइशों की बारिशसिर्फ भिंगु या डूब ही जाऊं तपती ठन्डे नभ की उम्मीदेंपुरजोर हो रहीContinue reading “क्या तुझे वो कुंदन कहूँ”

Let’s fly to future

There is nothing far beyondBeyond our thoughts or eyesWorld is too old nowNew seeds must germinateHolding on to nascent courageWisdom to embrace itselfFlaying the dirt off. What’s the worth of a dreamBeyond two eyes?For a flower can’t prosper, enclosedFor a river is nothing beyond its flowFor air is futile, amidst closed windowsA seed must germinateInContinue reading “Let’s fly to future”

Wink or Blink

A beauty from far worldSmile lurking beneath lipsEyes looked caringOrchid face, glowing as Venus It’s still day, am i dreaming again ?Holding the thrill of silenceMy eyes were turbulent,in anticipation of the melody. Mouth brimming of emotionsBut lips not cooperatingEyes jumping, bouncing in betweento narrate own storyof bewilderment and affection. Mind,full of PerplexionThoughts eroding sensesAContinue reading “Wink or Blink”

शायद दोष किसी का नहीं

टूट गए कुछ सपने आज फिरलौट के न आयी कुछ सांसेंहवाओं से पूछा गया,पलक झपकी किसकी,बता ज़िम्मेदार कौन बुलंद रास्तों पे दौड़ती इंसानियतअब क्या ज़िम्मेदारियों का बोझ हैदफ़न हो गयी क्या संवेदनाएंदौड़ में क्या बस एक खुद की धौंस है अपना कौन अब इस बढ़ रही दुनिया मेंखुशियां क्यों कम हो रही हैंअब अपनापन भीContinue reading “शायद दोष किसी का नहीं”