Tea vs Corona – A Promise Of Warmth

Whats all going on in the worldFaces are growing coldThey say Earth is sufferingSomething invisible, strangling souls. Wind is dancing on an unheard musicCries blasting the skyRichness of wisdom not holding power anymoreIs the faith in all mighty still intact? Is it just another game we are playing,just another theatre of lifewhere characters are fallingContinue reading “Tea vs Corona – A Promise Of Warmth”

बेलफ़्ज़

बेलफ़्ज़ है मेरी बेचैनीक्या आवाज़ दूँ इसेकिसको आवाज़ दूँधुंध की शक्ल ले रही ज़िन्दगीक्या अभी भी हवाओं का इंतज़ार करूँ रौशनी कित्ती दूर है मुझसेअपनापन है इन अंधेरों मेंकिताब अधूरी है ज़िन्दगी कीमैं निशब्द हूँ कहाँ से ढूँढू शब्दों कोभावनाएं ही तो ख़त्म हो रहीआँखें तो खुली हैंनमी सुख गयी है राज़ दफ़न मेरी ज़िन्दगीContinue reading “बेलफ़्ज़”

मकसद मेरी सोच का

मुझे बदलना नहीं इस दुनिया कोना ही नीचे या ऊपर दिखाना है व्यथित होता मनकुछ देख के, कुछ सुन केबदलते वक्त की श्याहीजन्म ले रही नए समाज की कलम टूट रहे कुछ पुराने घरनए घरों की संगत मेंहवाएं मायूस हैंजो बोझ बढ़ सा गया है बेमौसम ठंडी बरसातबुझते दिन और वो काली रातज़िन्दगी से ज़्यदाContinue reading “मकसद मेरी सोच का”

खुद की खोज

बहुत हुआ अँधेरे का खेल,अब एक रौशनी की खोज में निकलना है नील गगन की आभा है बढ़ रही,अब एक सुबह की खोज में निकलना है सागर ने पाँव वापस खींच लिए हैं,अब एक मोती की खोज में निकलना है ज़मीन के कोयले बहुत देख लिए,अब एक हीरे की खोज में निकलना है बहुत हुआContinue reading “खुद की खोज”

How shall I convince you now ?

Rising through the smoke of uncertaintyI wandered lonely as cloudsAir touched me in affectionBut left without any signHow shall I convince you now?That I walked in rain too Waiting for the mirror to replyI talked endlessly for nightsBreaths with tides got low and highThought they kept me alive,But they betrayed meSilently cleared my mind, myContinue reading “How shall I convince you now ?”

मेरा बोझ उठाती मेरी कवितायेँ

साथ देती तू मेरामेरी खंगालती खामोशियों मेंशांत तान्हाियों मेंझूमती रवाणियों में एक सोच के इशारे पेसाथ आ खड़ी हो जातीराज़ मेरे सारे मालूम तुझेमेरी अच्छाइयां बुराइयांसबका एहतराम है तुझे मेरे साथ सूरज भी देखतीचाँद की रौशनी भी सेंकतीवो पैदल से हवाओं का सफरसाथ थी तू , मेरे अंदर भी कहीं मेरे फ़िज़ूल ख्यालों कोशब्दों मेंContinue reading “मेरा बोझ उठाती मेरी कवितायेँ”